पति की पिटाई का दिया मेडल से जवाब, 8 साल बाद लिया पंगा; जीता देश के लिए मेडल

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लखनऊ: फिल्मी पर्दे की कहानी असल जिंदगी से काफी मुश्किल होती है. पर्दे पर कई मुश्किल चुनौती नजर नहीं आती हैं. आपने कंगना रानौत की फ़िल्म पंगा तो जरूर देखी होगी जिसमें एक महिला शादी के बाद कबड्डी के रिंग में कम बैक करती है. वो इसलिए कर पाती है क्योंकि उसके पति ने उसका साथ दिया. सोचिए कोई महिला रेसलिंग में अंतर्राष्ट्रीय पदक हासिल कर ले और इसमें उसके पति का साथ ना हो, साथ तो छोड़िये वो उसे पुरुषों के साथ रेसलिंग करने के लिए मारता भी हो तो शायद यकीन करना मुश्किल हो जाए. यह कहानी भारतीय महिला पहलवान गुरशरणप्रीत कौर की है. जिन्होंने पति की पिटाई के बावजूद अपने बुलंद हौसले और जज्बे से देश के लिए मेडल जीतकर पितृ सत्तात्मक समाज पर तमाचा मारा है.

महिला नहीं पुरुष पहलवानों से लड़ती थीं कुश्ती
गुरशरण प्रीत कौर ने 37 साल की उम्र में कुश्ती में 8 साल के बाद वापसी की और एक पदक अपने नाम किया. एशियन कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में 72 किलोग्राम भार वर्ग में गुरशरण ने कांस्य पदक जीतकर एक नया इतिहास रचा है. महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी गुरशरण ने बताया कि जब वे लड़कों के साथ अभ्यास करती थीं तो उनके पति उनको पीटा करते थे. पंजाब के तरनतारन की रहने वालीं गुरशरण ने बताया कि 2013 में उनकी शादी हो गई थी, लेकिन उनके पति उन्हें खेलने नहीं देते थे. लड़कों के साथ कुश्ती नहीं करने देते थे. जब वो लड़कों के साथ अभ्यास करती थीं तो पतिन उन्हें बहुत पीटते थे. इसलिए पति से अलग हो गईं. मुश्किलों से गुजरी गुरशरण की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए. एक वक्त लगा कि रेसलिंग में वापसी काफी मुश्किल है.

पति ने छोड़ा, मां ने संभाला
करीब 8 साल बाद रेसलिंग रिंग में वापस लौटीं गुरुशरण ने 2018 से फिर से अभ्यास करना शुरू किया. इस दौरान उनकी 4 साल की बेटी की देखभाल उनकी मां ने की. गुरुशरण ने कहा कि उन्होंने जो पदक जीता है वो अपनी मां की मदद से जीता है. उन्होंने उनका हमेशा से साथ दिया है. उन्हें किसी भी चीज की जरूरत होती है तो उनकी मम्मी ही पूरा करती हैं. गुरशणप्रीत कौर का कहना है कि जब पति उन्हें मारता-पीटता था तो मां उनका सहारा होती थीं.

फिल्मों से अलग होता है असल जीवन का संघर्ष
हालांकि कंगना की फ़िल्म की कहानी से मेल खाती उनकी जिंदगी की  कहानी पर गुरुशरण ने कहा कि फ़िल्म उन्होंने अभी नहीं देखी है केवल सुना है, लेकिन असली जिंदगी की कहानी ज्यादा कठिन होती है जैसे कि उनके पति ने उनको छोड़ दिया. जबकि फ़िल्म में कंगना के पति ने उनको सपोर्ट किया है. गुरुशरण कहती हैं कि शादी के बाद किसी भी क्षेत्र में महिला को उसके पति का सहारा मिले तो वो आसमान की बुलंदी भी छू सकती है, लेकिन उसके साथ ऐसा नहीं हुआ.

ओलंपिक क्वॉलिफाई पर फोकस
आठ साल के बाद कुश्ती में वापसी के बाद अब गुरुशरण का लक्ष्य ओलंपिक के लिए आगामी बुधवार को लखनऊ में होने वाले ट्रायल को जीतना है. जिसके लिए वो जी तोड़ मेहनत कर रही हैं. कुश्ती की दुनिया में भले ही गुरुशरण की कामयाबी बहुत बड़ी न हो, लेकिन जिन परिस्थितियों में गुरुशरण ने ये कामयाबी हासिल की है वो समाज और महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक कहानी है.

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