5 मार्च से शुरू होने वाले पंचायत चुनाव टाले गए, चुनाव आयोग ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया

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  • 5 मार्च से 20 मार्च तक 12500 पंचायत सीटों पर 8 चरणों में पंचायत चुनाव कराए जाने थे
  • चुनाव आयोग ने बताया- गृह विभाग से सुरक्षा को लेकर मिले इनपुट्स के बाद चुनाव टालने का फैसला किया

Dainik Bhaskar

Feb 19, 2020, 10:02 AM IST

जम्मू. जम्मू-कश्मीर में 5 मार्च से होने वाले पंचायत उपचुनाव 3 हफ्तों के लिए टाल दिए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने मंगलवार को कहा कि सुरक्षा कारणों की वजह से चुनावों को टाला गया है, नए शेड्यूल की सूचना जल्द दी जाएगी। पंचायत चुनावों को लेकर विपक्षी दलों ने नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि हमारे नेता नजरबंद हैं, ऐसे में हम पंचायत चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते हैं।

राज्य में सभी ब्लॉक में रिक्त 12,500 पंचायत सीटों के लिए 5 मार्च से 20 मार्च तक 8 चरणों में पंचायत चुनाव कराए जाने थे। पहले चरण का चुनाव 5 मार्च, दूसरे चरण का 7 मार्च, तीसरे चरण का 9 मार्च, चौथे चरण का 12 मार्च, पांचवें चरण का 14 मार्च, छठे चरण का 16 मार्च, सातवें चरण का 18 मार्च और 8वें चरण का चुनाव 20 मार्च को होना था।

नेकां ने कहा था- नेताओं के बिना प्रचार कैसे कर पाएंगे
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा था कि वह पंचायत चुनाव में हिस्सा लेगी, लेकिन पार्टी ने यह भी कहा था कि हमारे नेताओं फारूक और उमर अब्दुल्ला को रिहा किया जाए। क्योंकि, उनके बिना पार्टी प्रचार कैसे कर पाएगी। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा था कि पार्टी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की समर्थक है। हम राज्य में 8 चरणों में 11 हजार सीटों के लिए होने वाला पंचायत चुनाव लड़ना चाहते हैं।

लद्दाख में फिलहाल चुनाव नहीं होगा
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से प्रस्ताव नहीं मिलने के कारण पंचायत चुनाव के लिए उसे शामिल नहीं किया है। लद्दाख में बर्फबारी के चलते भी चुनाव आयोग ने वहां अभी चुनाव करवाना व्यावहारिक नहीं समझा था।

पिछली बार पंचायत चुनाव दिसंबर 2018 में हुए थे

जम्मू-कश्मीर में पिछली बार पंचायत चुनाव दिसंबर 2018 में हुए थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस समेत कुछ अन्य पार्टियों ने चुनाव का बहिष्कार किया था। आतंकवादी संगठनों ने भी लोगों को मतदान न करने के लिए धमकाया था। इन कारणों से कई स्थानों पर मतदान नहीं हो पाया था। बीडीसी चेयरमैन का निर्वाचन होने के बाद भी कई सीटें खाली हो गई थी। रिक्त पदों पर चुनाव होने की मांग हो रही थी। जम्मू-कश्मीर के सरपंचों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों के साथ गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी।



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