72% भारतीय मानते हैं- मोदी के शासन में महंगाई बढ़ी, 66% के लिए रोजाना का खर्च संभालना अब मुश्किल

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  • 2014 में यूपीए के शासन में 65.9% लोगों ने कहा था- रोजमर्रा का खर्च संभालना मुश्किल, 2015 में यह संख्या 46.1% थी
  • 28.8% लोगों का मानना है कि आम आदमी की जिंदगी सुधरी, 2015 में हुए ऐसे ही सर्वे में 39.3% लोगों की यही राय थी

Dainik Bhaskar

Jan 30, 2020, 11:11 PM IST

नई दिल्ली. 72% भारतीय मानते हैं कि नरेंद्र मोदी के शासनकाल में महंगाई बढ़ी है और इसके चलते आम आदमी की दिक्कतें भी। 40% भारतीयों का मानना है कि महंगाई का बुरा असर उनके जीवन की गुणवत्ता पर पड़ा है। 65.8% का कहना है कि उनके लिए रोजाना का खर्च संभालना अब मुश्किल हो गया है। 2014 में यूपीए के समय में भी 65.9% लोगों ने यही बात कही थी, जबकि 2015 में यह संख्या 46.1% थी।

आम बजट से पहले आईएएनएस-सीवोटर ने 4292 लोगों के बीच जनवरी के तीसरे और चौथे हफ्ते में एक सर्वे किया। महंगाई, आम आदमी, खर्च को लेकर सवाल किए गए। सर्वे के मुताबिक, 48% भारतीय मानते हैं कि बीते एक साल में आम आदमी की जिंदगी बर्बाद हो गई है।

सर्वे में क्या आया सामने 

  • मासिक आय : प्री-बजट सर्वे में सामने आया कि लोग अपनी उम्मीदों और आशाओं से कम हासिल कर पा रहे हैं और ऐसे में कम आय भी उनके लिए काफी है। सर्वे में शामिल 51.5% लोगों का मानना है कि उनके लिए 20 हजार की मासिक आय भी पर्याप्त है। 2019 में 50.2% लोगों की यही राय थी। इस बार हुए सर्वे में 23.6% का मानना है कि 4 लोगों के परिवार के लिए 20-30 हजार के बीच आय जरूरी है।
  • इनकम टैक्स: एक फरवरी को आने वाले बजट को लेकर लोगों ने सबसे ज्यादा उम्मीद इनकम टैक्स में छूट से लगा रखी है। ज्यादातर का मानना है कि 4.3 लाख तक की आय टैक्स फ्री होनी चाहिए ताकि वे अपने परिवार के लिए एक सामान्य जिंदगी को साकार कर सकें। मौजूदा समय में 2.5 लाख की सालाना आय को टैक्स फ्री रखा गया है। पिछले 10 साल से यह मांग की जा रही है कि टैक्स में छूट 4 लाख/साल से कम नहीं होनी चाहिए।
  • आम आदमी: 48.4% लोगों का मानना है कि आम आदमी के जीवन की गुणवत्ता बीते एक साल में बर्बाद हो गई है। 2015 में हुए ऐसे ही सर्वे में 24.6% लोगों की यही राय थी। जनवरी 2020 में हुए सर्वे में 28.8% लोगों का मानना है कि आम आदमी की जिंदगी में सुधार हुआ। 2015 में हुए ऐसे ही सर्वे में 39.3% लोगों ने कहा था कि आम आदमी की जिंदगी में सुधार हुआ। 21.3% को लगता है कि इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ और 1.4% ने कहा कि उन्हें पता नहीं या वे कुछ कह नहीं सकते।



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